२०१२ आने वाला है ,,, उसका स्वागत करिए | पर देखना है कि कितने गरीब , किसान , मजदूरों की समस्याये हल होती है इस साल में | कितनी खुशियाँ मिलती है ... बाकी खुश रहने वाले बहाना ढूंढ़ ही लेते है...
शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011
" विजय पताका ": dev aanand
" विजय पताका ": dev aanand: ना जाओ अभी छोड़ के कि दिल अभी भरा नहीं ... हां एक सदाबहार अभिनेता , हर दिल जवां इन्सान आज कहा चला गया कब आयेगा ल...
२०१२ में कितनी खुशियाँ ...
२०१२ आने वाला है ,,, उसका स्वागत करिए | पर देखना है कि कितने गरीब , किसान , मजदूरों की समस्याये हल होती है इस साल में | कितनी खुशियाँ मिलती है ... बाकी खुश रहने वाले बहाना ढूंढ़ ही लेते है... मैंने कहा ...
दुआ करिए...
साल २०११ जाते जाते , न जाने कितनी बड़ी साहित्तिक सांस्कृतिक हस्तिओं को अपने साथ ले गया
अभी २०११ को बीतने में आज से कुछ दिन और बाकी है ... दुआ करिए कोई और हमें छोड़ के न जाये
फिर भी देखते रहिये २०११ ...
अभी २०११ को बीतने में आज से कुछ दिन और बाकी है ... दुआ करिए कोई और हमें छोड़ के न जाये
फिर भी देखते रहिये २०११ ...
मंगलवार, 22 नवंबर 2011
सोमवार, 21 नवंबर 2011
Mera Blog Mera Mother India . . .
मैंने इस ब्लॉग को इलाहबाद में १० मिनट में तैयार किया सालों पहले और फिर
आज , आज मिला जाकर दिल्ली में |
क्या नसीब है मेरा , मेरे इस ब्लॉग का ,
जिसे मै कुम्भ के मेले में खो गया बच्चा मानकर संतोष कर के बैठ गया था
आज अचानक मेरे सामने आ गया
एकदम वही फ़िल्मी एहसास जैसे "माँ " को उसका वर्षों पहले खोया बेटा मिल गया हो
उसके कलेजे का टुकड़ा मिल गया हो
हाँ , एकदम वही एहसास |
होता भी क्यों न ,,, मैंने इस ब्लॉग को क्या सोच के बनाया था
क्या सोच के "मदर इंडिया " रक्खा था इसका नाम
ये सब कुछ खास था मेरे लिए
सोचा था अपनी जान डाल दूंगा इसमें ,,,
पर जो हुआ अब उससे आप सब परिचित हैं
खैर , आज खुशी मनानें का दिन है
मेरा ब्लॉग मुझे वापस मिल गया है |
अब मै इसे बड़े लाड प्यार पालूंगा
मेरा ब्लॉग मेरा "मदर इंडिया "
और क्या क्या कह दू इस ख़ुशी में
आगे कुछ नहीं सुझा रहा ,,,
बस अपने शब्दों को विराम दूंगा
और इस खुशी में सरिक होऊंगा ....
"जय हिंद " साथियों ....................
आज , आज मिला जाकर दिल्ली में |
क्या नसीब है मेरा , मेरे इस ब्लॉग का ,
जिसे मै कुम्भ के मेले में खो गया बच्चा मानकर संतोष कर के बैठ गया था
आज अचानक मेरे सामने आ गया
एकदम वही फ़िल्मी एहसास जैसे "माँ " को उसका वर्षों पहले खोया बेटा मिल गया हो
उसके कलेजे का टुकड़ा मिल गया हो
हाँ , एकदम वही एहसास |
होता भी क्यों न ,,, मैंने इस ब्लॉग को क्या सोच के बनाया था
क्या सोच के "मदर इंडिया " रक्खा था इसका नाम
ये सब कुछ खास था मेरे लिए
सोचा था अपनी जान डाल दूंगा इसमें ,,,
पर जो हुआ अब उससे आप सब परिचित हैं
खैर , आज खुशी मनानें का दिन है
मेरा ब्लॉग मुझे वापस मिल गया है |
अब मै इसे बड़े लाड प्यार पालूंगा
मेरा ब्लॉग मेरा "मदर इंडिया "
और क्या क्या कह दू इस ख़ुशी में
आगे कुछ नहीं सुझा रहा ,,,
बस अपने शब्दों को विराम दूंगा
और इस खुशी में सरिक होऊंगा ....
"जय हिंद " साथियों ....................
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