गुरुवार, 30 अगस्त 2012

माँ


                               
                                  माँ, मै और बचपन


तू बहुत अच्छी है 
और बहुत भोली भी 
तुझको कभी लड़ते या झगड़ते नहीं देखा 
औरों को तो देखा है 
मै तेरी डाट खाने के लिए तरसा हूँ माँ 
तूने कभी मुझे मारा भी नहीं क्यू माँ 
मांगा नहीं मेरे खर्चों का हिसाब  क्यू 
मै देना चाहता हूँ , वो सब कुछ 
जो मेरा है , वो सब  तेरा है माँ 
मैंने तुझे लंबी रातों मे जागते देखा है माँ 
जब मै बिस्तर पर  बीमार पड़ा रहता था 
जब चोट खाये कराह रहा था 
पूरी रात टकटकी लगाए देखती रही 
चुप कराती रही मुझे कि रोते नही बेटा 
मेरे आँसू पोछती रही अपने आँखों मे आँसू भर के भी 
मेरा बचपन तू ही तो है माँ
तेरी गोदी मे खूब सोया हूँ माँ
तेरे आंचल से मैंने मुह भी पोछा है माँ
तेरे हाथ की मीठी रोटीयो को पाया हूँ माँ 
तेरे प्यार भरे हाथों से खूब नहाया हूँ माँ 
तेरी यादों के साये मे , मेरा बचपन
बस यूं ही चलता रहे माँ
बस यूं ही चलता रहे माँ
बस यूं ही चलता रहे माँ .............
                                                       आज  दिनांक 30 अगस्त 2012 की सुबह  11 बजे माँ की यादों मे खोया हुआ मै. 




                                                                            मेरे बचपन की एक तस्वीर, जो कही खोयी हुयी थी
                                      तस्वीर तो मिल गयी, काश बचपन भी मिल जाता .......