सोमवार, 12 नवंबर 2012


                                                         जय भीम
मैने एक दिन लिखा था और आज फिर कह रहा हूँ कि अगर धर्म नाम की कोई चीज होती है तो डा. भीम राव अम्बेडकर अपने आप मे एक धर्म हैं और अगर ईश्वर नाम की कोई चीज होती है तो डा. भीम राव अम्बेडकर ईश्वर हैं, जिसे लोग देख सकते थे, सुन सकते थे, जिसके विचारों से रूबरू हो सकते हैं और उसे समझ सकते हैं और जब तक ये इन्सानी क़ौम जिन्दा रहेगी तब तक डा. भीम राव अम्बेडकर अपने आप मे एक धर्म और ईश्वर के रूप मे रहेंगे और परिवर्तन करते रहेंगे । जय भीम आज सिर्फ दो शब्द नही, ये समाज का वो परिवर्तन है और वो उर्जा है जो उसे जीवित रखता है आगे बढ़ाता है ।
मेरे जन्मस्थली के गाँव और उससे सटे सैंतीस गावों में दिलीप मंडल कभी नही आये हैं और ना ही यहाँ लोग फेसबुक इस्तेमाल करते हैं, जो लोगों को बता सके डा. अम्बेडकर के बारे में (ये तो बस एक नाम है और भी ऐसे कई लोग हैं जो ऐसे परिवर्तन में आन्दोलनरत हैं) यहाँ घूमने पर और लोगों से मिलनें पर आपको ज्यादातर लोग नमस्ते, राम-राम, जय श्री राम, गुड बाय बोलते नही दिखेंगे ,,, क्योंकि यहां जय भीम बोला जाता है और विश्वास करता हूँ कि ये सिर्फ यहीं नही बल्कि इस देश के सभी जगहों पर और विश्व के कई देशों में बोला जाता होगा । आज  जय भीम सिर्फ जागरुकता की निशानी नही बल्कि आस्था का बिषय भी है । खुशी है कि आज क्षत्रीय और ब्राहमण वर्चस्व (पूर्वाग्रह) टूट रहा है और आगे भी टूटता रहेगा जिस दिन जय भीम की इस सच्ची आस्था में परिनर्तनशील विचारों का आन्दोलन और जागरुकता मिल जायेगी पूर्वाग्रह पूरी तरह से अपना बोरिया बिस्तर समेट लेंगे ।
(और हाँ क्योंकि इसलिए भी कि शूद्र द राइजिंग हो चुका है............)

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salam india
ab suruat ho rahi hai ek naye aaj ki
dekhte rahiye
mother india..............